नई दिल्ली।
केन्द्र सरकार ने अब आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर गुणवत्ता प्रमाण पत्र जरूरी कर दिया है। दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता स्थित एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (Export Inspection Council – EIC) से गुणवत्ता प्रमाण पत्र की मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही आटा, मैदा और सूजी का निर्यात किया जा सकेगा।
बता दें कि बीते 13 मई को भारत सरकार ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध (Wheat Export Ban) लगा दिया था। जिसके बाद आटा, मैदा और सूजी के भाव बढ़ने लगे गए हैं। भाव बढ़ने के बाद अंदेशा लगाया जा रहा है कि इनकी गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ हो सकती है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने प्रमाणित संस्था से गुणवत्ता प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया है।
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खाने-पीने का सामान हुआ महंगा
– खाद्य वस्तुओं पर लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है। गत 12 जुलाई को विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी – DGFT – Directorate General of Foreign Trade) ने आटा, मैदा व सूजी के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतें बढीं। आज स्थिति ऐसी है कि सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी कीमतें थम नहीं रहीं। नमक, चावल, डाल सहित तमाम खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रहीं हैं।
यह महंगाई पर काबू पाने का एक और प्रयोग
– केन्द्र सरकार ने महंगाई पर काबू पाने के लिए यह प्रयोग किया है। इस प्रयोग के बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि बढ़ती महंगाई पर कुछ हद तक राहत मिलेगी। यहिं वजह है कि सरकार ने खाद्य वस्तुओं पर शिकंजा कसा है।
ये भी पढ़ें: गेहूं के फर्जी निर्यात की जांच कर सकती है सीबीआईअंतर मंत्रालय समिति की सिफारिश भी होगी अनिवार्य
– सोमवार को डीजीएफटी ने कहा, ‘निर्यात नीति या गेहूं का आटा, मैदा, सूजी (रवा या सिरगी), साबुत आटा जैसी सामग्रीयां नियंत्रणमुक्त हैं। साथ ही निर्यात के लिए गठित अंतर मंत्रालय समिति की सिफारिश की जरूरत होगी। आईएमसी द्वारा अनुमोदित सभी निर्यात की अनुमति दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई में निर्यात निरीक्षण परिषद या ईआईसी (Export Inspection Council – EIC) (निर्यात निरीक्षण एजेंसी) द्वारा गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी करने के बाद ही दी जाएगी।
Source आटा, मैदा और सूजी के निर्यात को अब देना होगा गुणवत्ता प्रमाण पत्र

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